मेरा साथी

A beautiful ghazal written by Apoorva.

“कुछ यूँ बुनी इस मुल्क़ की एक नयी हक़ीक़त उसने

जो सदियों मेज़बान थे, उन्हें मेहमान बना डाला”

via मेरा साथी